जीवन कौशल प्रबंधन एवं अभिवृत्ति -1

प्र.1 शिक्षक की भूमिका का तात्पर्य है?

उ. बच्चों के बाद शिक्षक ही सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व्यक्ति है, जो शिक्षण-अधिगम की सफलता का निर्धारण करता है। शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और शिक्षक अत्यंत प्रभावशाली स्थिति में होता है। वह अधिगम की गति को निर्धारित करता है।


प्र.2 अध्यापक की प्रमुख भूमिका क्या है?

उ. कक्षाध्यापक के रूप में, एक सहकर्मी के रूप में, समुदाय के सदस्य रूप में तथा एक नागरिक के रूप में अध्यापक अपनी भूमिका निभाता है।

प्र.3 अध्यापक से क्या अपेक्षा की जाती है?
उ. शिक्षा के क्षेत्र में एक आधार-व्यक्ति होने के कारण, अध्यापक से कक्षाध्यापक के रूप में, एक सहकर्मी के रूप में, समुदाय के एक सदस्य के रूप में तथा देश के एक नागरिक के रूप में बहुआयामी व्यक्तित्व की अपेक्षा की जाती है।


प्र.4 अध्यापन से क्या तात्पर्य है?

उ. अध्यापन एक जटिल और संश्लिष्ट प्रक्रिया है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विद्यार्थी में सुनिश्चित अधिगम को बढ़ावा देने के प्रयोजन से अंतःक्रिया के लिए नियंत्रित परिवेश प्रदान किया जाता है।


प्र.5 प्रबंधक के रूप में अध्यापक की क्या भूमिका होती है?

उ. प्रबंधक के रूप में अध्यापक की भूमिका का शिक्षण के उन तीनों चरणों अर्थात् शिक्षण-पूर्व, शिक्षण प्रक्रियागत और शिक्षणोत्तर से संबंध होता है।


प्र.6 संवृत्ति किसे कहते हैं?

उ. कोई ऐसे व्यवसाय को जिसके लिए किसी विशिष्ट अध्ययन और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है तथा जिसका प्रयोजन किसी निश्चित शुल्क अथवा पारिश्रमिक के बदले सामान्यतः कौशलपूर्ण सेवा और मार्गदर्शन प्रदान करना होता है, संवृत्ति कहलाता है।


प्र.7 संवृत्ति के प्रमुख अभिलक्षण क्या हैं?

उ. प्रत्येक संवृत्ति के कुछ विशिष्ट अभिलक्षण निम्नलिखित है
(i) संवृत्ति विशिष्ट ज्ञान भंडार और विस्तृत प्रायोगिक प्रशिक्षण की अपेक्षा रखती है।
(ii) संवृत्ति आवश्यक समाज-सेवा प्रदान करती है।
(iii) संवृत्ति अपने सदस्यों से निरंतर सेवाकालीन प्रशिक्षण की अपेक्षा रखती है।
(iv) संवृत्ति के हितों की रक्षा के लिए प्रत्येक संवृत्ति का एक सुनिश्चित सदस्य वर्ग होता है।
(v) प्रत्येक संवृत्ति की अपनी आचार संहिता होती है।
(vi) प्रत्येक संवृत्ति अपना निजी संवृत्तिक संगठन गठित करती है।
(vii) प्रत्येक संवृत्ति अपने सदस्यों को संवृत्तिक जीवन के प्रति आश्वस्त करती है।


प्र.8 अध्यापन संवृत्ति के अभिलक्षण कौन-से हैं?

उ. अध्यापन संवृत्ति के अभिलक्षण निम्नलिखित हैं
(i) इसमें अनिवार्यतः एक बौद्धिक संक्रिया समाविष्ट होती है।
(ii) यह विज्ञान से सामग्री लेती है।
(iii) यह अनगढ़ सामग्री को एक व्यावहारिक और सुनिश्चित स्वरूप प्रदान करती है।
(iv) इसकी प्रविधि शैक्षिक रूप से संप्रेषणीय होती है।
(v) इसकी प्रवृत्ति स्व-संगठनोन्मुख होती है आदि।

प्र.9 विषय-वस्तु पर अधिकार से क्या तात्पर्य है?

उ. विषय-वस्तु पर अधिकार किए बिना कोई भी व्यक्ति प्रभावी अध्यापन नहीं कर सकता। यह अधिकार अनेक तरीकों से प्राप्त किया जा सकता है यथा-पुस्तक, पत्र-पत्रिकाएं, कोश, विश्वकोश, समाचार-पत्र आदि के पढ़ने से, संगोष्ठी, कार्यशाला, परिसंवाद, सम्मेलन, सार्वजनिक सभा आदि में भाग लेने से, सहकर्मियों, विशेषज्ञों, अधिकारियों से विचार-विमर्श करने से, नेताओं और अन्य संवृत्तिकों से मिलने से, अपने पर्यावरण के भीतर और बाहर की घटनाओं के प्रेक्षण से तथा ऐसे ही अन्य तरीकों के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने से।

प्र.10 शैक्षणिक कौशल के प्रमुख स्तंभ कौन-कौन से हैं?

उ. प्रस्तावना, प्रश्न पूछना, सूक्ष्म रूप से जाँच करना, पुनर्बलन करना, स्पष्ट करना, उदाहरण देकर समझाना, अध्येताओं के अवधानात्मक व्यवहार को पहचानना, दृश्य-श्रव्य साधनों का प्रयोग करना, श्यामपट्ट का उपयोग करना, मौन तथा अशाब्दिक संकेत देना, उद्दीपनों में विविधता लाना, समापन करना शैक्षणिक कौशल के प्रमुख स्तंभ हैं।

प्र.11 अध्यापक के अन्य प्रभावी गुण कौन-कौन से हैं?

उ. विषय-वस्तु पर अधिकार तथा शैक्षणिक कौशलों के साथ साथ, अध्यापक के अन्य प्रभावी गुण हैं-उत्तरदायित्व बोध, अध्येताओं के प्रति सरोकार की भावना, अध्येताओं के प्रयासों की स्वीकृति और सराहना, प्रत्येक अध्येता को एक विशिष्ट व्यक्ति के रूप में मान्यता देना, स्नेहभाव रखना तथा लगाव महसूस करना आदि।

प्र.12 उपबोधक का क्या अर्थ है?

उ. उपबोधक का अर्थ सलाह देना होता है। प्रभावी उपबोधक की दृष्टि से अध्यापक का सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण समस्या वाले विद्यार्थियों के अभिनिर्धारण के प्रति उसकी संवेदनशीलता है।

प्र.13 प्रभावी उपबोधक के प्रमुख गुण क्या हैं?

उ. गहन प्रेक्षण, संवेदनशीलता, समानुभूति (विद्यार्थी के परिप्रेक्ष्य से समस्या को देख पाना), वस्तुनिष्ठता प्रभावी अपबोधक के गुण हैं।

प्र.14 एक अध्यापक में कौन-कौन से गुण होने चाहिए?

उ. सेवा भावना, निःस्वार्थता, कर्तव्यनिष्ठा, धनलोलुप न होना, लोगों के प्रति स्नेहमय, समानुभूति एवं सहनशीलता और अच्छा श्रोता के गुण एक अध्यापक में विद्यमान होने चाहिए।

प्र.15 शिक्षण-पूर्व चरण में अध्यापक की क्या भूमिका होती है?

उ. शिक्षण-पूर्व चरण में अध्यापक की भूमिका मूलतः प्रबंधक/ योजना निर्माणकर्ता/निर्णयकर्ता की होती है। इस चरण में अध्यापक शैक्षणिक उद्देश्य निश्चित करता है, उन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उपाय निर्धारित करता है और उद्देश्यों की सम्प्राप्ति की सीमा के मापन के लिए युक्तियाँ सोचता है।

प्र.16 सहानुभूति का तात्पर्य स्पष्ट करें?

उ. सहानुभूति एक ऐसा गुण है, जिसकी अध्यापक को सर्वाधिक आवश्यकता होती है। यह गुण अध्यापक को अपने विद्यार्थियों की समस्याओं से तथा उनके समायोजन के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों से जोड़ेगा।

प्र.17 अध्यापक प्रशिक्षण से आप क्या समझते हैं?

उ. प्रभावी अध्यापक होने के लिए, व्यक्ति को अनेक वैयक्तिक गुण और व्यवसायिक दक्षताएं विकसित करनी होती है। अध्यापक बनने के इच्छुक व्यक्ति को समय-समय पर प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। ताकि वह अपने आपको अद्यतन बनाए रखे।

प्र.18 अध्यापक शिक्षा के कितने चरण हैं?

उ. अध्यापक-शिक्षा को एक सतत, प्रक्रिया माना गया है जिसके तीन स्पष्ट तथा परस्पर संबंधित चरण हैं। ये चरण निम्नलिखित हैं-
(i) सेवा पूर्व प्रशिक्षण
(ii) प्रेरण प्रशिक्षण एवं
(iii) सेवाकालीन प्रशिक्षण।

प्र.19 सेवापूर्व प्रशिक्षण का क्या उद्देश्य है?

उ. सेवापूर्व प्रशिक्षण का उद्देश्य अध्यापक में अपने व्यवसाय के प्रति आधारभूत अंदृष्टि तथा विविध शिक्षण-अधिगम प्रकार्यों के लिए अपेक्षित मूल कौशलों का विकास करना है।

प्र.20 प्रेरण तथा कार्य संपादन चरण के आशय को स्पष्ट करें?

उ. प्रशिक्षण के प्रेरण और कार्य संपादन चरण का उद्देश्य नवनियुक्त अध्यापकों को उस संस्था की रीतियों, तौरतरीकों तथा क्रिया-कलापों से परिचित कराना है, जहाँ उनकी नियुक्ति हुई है।

प्र.21 कार्यशाला आयोजन से क्या तात्पर्य है?

उ. सेवाकालीन अध्यापक-प्रशिक्षण के लिए कार्यशाला एक अन्य प्रभावी विधि है। इसमें भाग लेने से अध्यापक अपेक्षित सैद्धांतिक ज्ञान के अतिरिक्त अपने सामने आने वाली समस्याओं के बारे में व्यावहारिक अनुभव भी संचित कर सकता है।

प्र.22 संगोष्ठी से आप क्या समझते हैं?

उ. संगोष्ठी, विशिष्ट प्रकरणों के बारे में जानकारी देने के लिए शिक्षा से संबंधित संगठनों द्वारा प्रयुक्त एक सामान्य साधन है। इसमें लघु समूह में परिचर्चा सत्र के उपरांत आलेख या संदर्शक व्याख्यान प्रस्तुत किया जा सकता है।

प्र.23 नामिका (पैनल) परिचर्चा का आशय स्पष्ट करें?

उ. नामिका (पैनल) परिचर्चा में विशेषज्ञों का एक पैनल किसी समस्या के कुछ चुने गए पक्षों पर अपने विचार प्रस्तुत करता है। तदुपरांत श्रोता वर्ग द्वारा प्रश्न पूछे जाते हैं और पैनल के सदस्य उनका उत्तर देते हैं।

प्र.24 विद्यार्थियों द्वारा अध्यापकों के मूल्यांकन की आवश्यकता को स्पष्ट करें?

उ. विद्यार्थियों द्वारा किया गया मूल्य-निर्धारण कक्षा में अभिप्रेरण, अधिगम अवसर, अध्यापक और विद्यार्थी के बीच सौहार्द्र और संप्रेषण की मात्रा तथा कक्षा समरसता के बारे में जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत होता है।

प्र.25 समकक्षी मूल्यांकन से क्या तात्पर्य है?

उ. समकक्षी मूल्यांकन वह मूल्यांकन है जिसमें अध्यापक अपनी प्रत्यक्ष जानकारी और अनुभव के आधार किसी अन्य अध्यापक के कार्य-व्यवहार के गुण-दोषों एवं महत्व का परीक्षण और मूल्यांकन करते हैं।

प्र.26 अध्यापक को अधिगम परिणाम के संबंध में क्यों सुस्पष्ट होना चाहिए?

उ. अध्यापक को अधिगम परिणामों के बारे में सुस्पष्ट होना चाहिए, क्योंकि उन्हें के द्वारा निर्णय होता है कि अधिगम कार्यों का आयोजन किस प्रकार किया जाना है।

प्र.27 अधिगम अनुभवों के आयोजन में अध्येताओं का पूर्व ज्ञान क्यों महत्वपूर्ण है?

उ. अधिगम अनुभवों के आयोजन में अध्येताओं का पूर्व ज्ञान महत्वपूर्ण है, क्योंकि उससे नए ज्ञान के उपार्जन में मदद मिलती है।

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