जीवन कौशल प्रबंधन एवं अभिवृत्ति – 2

प्र.1 अधिगम संस्कृति के निर्माण से आप क्या समझते हैं?
उ. अधिगम संस्कृति के निर्माण का अर्थ एक ऐसे अधिगम परिवेश का निर्माण करना है जिसमें सभी व्यक्ति नए ज्ञान की रचना में सहयोग करते हैं।

प्र.2 प्रक्रिया सामग्री को अभिकल्पित करने की बुनियादी अवधारणा क्या है?

उ. अधिगम का आधार विषय-वस्तु या मानव द्वारा अंतःक्षेप है, जो विषय-वस्तु और अधिगम क्रियाकलापों के अनुक्रमों का आयोजन करता है। सफल अधिगम में, विषय-वस्तु और अधिगम क्रिया-कलापों की अभिकल्पना सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है।

प्र.3 गुंटर, ऐस्टीस और श्वाब के अनुसार, किन चार तत्वों से प्रक्रिया सामग्री विकास कार्यविधियों का ढाँचा तैयार होता है?

उ. गुंटर, ऐस्टीस और श्वाब प्रक्रिया सामग्री विकास के चार मुख्य तत्वों पर बल देते हैं- अध्येता, उद्देश्य, विधियाँ और आंकलन।

प्र.4 छोटे बच्चों के विकास के लिए उपयुक्त सिद्धांतों का नाम लिखिए?

उ. छोटे बच्चों के विकास के उपयुक्त सिद्धांत हैं(i) सरल स्पष्ट और मूर्त डिजाइन, (ii) अधिगम निर्देशन, (iii) प्रगामी और व्यक्तिकृत, (iv) लक्ष्य समूह के लिए प्रासंगिक (v) एकीकृत क्रिया-कलाप, (vi) सक्रिय और सुखद (vii) अनेक विकल्पों सहित अन्वेषण

प्र.5 अन्योन्य क्रियात्मक प्रक्रिया सामग्री अध्येताओं को किसके लिए प्रेरित करती है?

उ. अन्योन्य क्रियात्मक प्रक्रिया सामग्री अध्येताओं को संज्ञानात्मक सहभागिता के लिए अभिप्रेरित करती है।

प्र.6 अन्योन्य क्रियात्मक अधिगम के प्रमुख दो आरूप (डिजाइन) कौन-से हैं?

उ. अन्योन्य क्रियात्मक अधिगम में, दो आरूप हैं- रैखिक और शाखित।

प्र.7 प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना में कृंतक-अनुक्रिया रूपक दृष्टिकोण क्या है?

उ. वृंतक अनुक्रिया रूपक व्यवहारपरक मनोविज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित है। इसका अभिलक्षण अध्येता का शैक्षणिक सामग्रियों के साथ प्रकट अन्योन्य क्रिया है। शैक्षणिक उद्दीपनों के प्रति अध्येता की अनुक्रियाओं को निश्चित रूप प्रदान करके अधिगम को बढ़ाया जाता है।

प्र.8 प्रक्रिया सामग्री डिजाइन करते समय किन रीतियों को ध्यान में रखना चाहिए?

उ. प्रक्रिया सामग्री डिजाइन के समय निम्नलिखित रीतियों का ध्यान रखना चाहिए-(i) उद्देश्य का स्पष्टतः कथन करना
(ii) प्रत्येक अध्येता के प्रति आदर और सरोकार दर्शाना
(iii) विषय-वस्तु को रोचक और उत्तेजक बनाना
(iv) उपयुक्त भाषा और शब्दों का इस्तेमाल करना
(v) सीखी जा रही संकल्पनाओं के बहुपरिप्रेक्ष्य प्रदान करना
(vi) अध्येता के अनुभवों को इस्तेमाल करना
(vii) अध्येता को समस्या-समाधान में लगाना
(viii) उद्दीपनकारी (Stimulating) विविधताओं को प्रदान करने के लिए श्रव्य और दृश्य सामग्रियों का इस्तेमाल करना।
(ix) कार्य/विषय वस्तु को उपयुक्त भार देना।
(x) उपयुक्त आंकलन विधियों को लागू करना, जिसके प्रयोजन को अध्येता साफ-साफ समझ सकें।

प्र.9 अभिवृत्तियों और व्यवहार के लिए प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना करने के तीन सिद्धांत कौन-से हैं?

उ. अभिवृत्तियों और व्यवहार के लिए प्रक्रिया सामग्री की अभिकल्पना करने के तीन सिद्धांत निम्नलिखित हैं-
(i) शिक्षार्थियों को बताइए कि जो प्रकरण (विषय-वस्तु) वे पढ़ रहे हैं, वह उनके लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी है।
(ii) प्रकरण उसके लिए क्यों महत्वपूर्ण है इस बात के कारण या विश्वासप्रद स्पष्टीकरण प्रस्तुत कीजिए।
(iii) अंतर्जात और बहिर्जात पुरस्कारों/प्रबलन की व्यवस्था कीजिए।

प्र.10 बेताल रूपक विचारण सम्प्रदाय के अनुसार अधिगम किस प्रकार की क्रिया है?

उ. बेताल रूपक विचारण सम्प्रदाय के अनुसार, अधिगम को स्वसक्रिय माना जाता है।

प्र.11 अध्यापकों के लिए संवृत्तिक कार्य-कलाप में भाग लेना क्यों आवश्यक है?

उ. अध्यापकों के लिए संवृत्तिक कार्य-कलापों में भाग लेना अति आवश्यक है क्योंकि ये औपचारिक परिवेश में उनके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। ऐसे कार्यकलापों में मुख्य रूप से पढ़ाना, चर्चा करना, शोध करना, व्याख्यान देना, संगोष्ठियों, समीक्षा करना, शोधपत्र लिखना, नए उपकरणों, उपस्करों
का निर्माण एवं उन्हें बेहतर बनाना आदि कार्य शामिल है।

प्र.12 अध्यापक अपने प्रशिक्षण और विकास के लिए मुख्य रूप से किस पर निर्भर हैं?

उ. अध्यापक अपने प्रशिक्षण और विकास के लिए मुख्य रूप से सरकार या औपचारिक संस्थान जैसे राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.ई.आर.टी.) और राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा) पर निर्भर है।

प्र.13 अध्यापक को अध्यापन के समय किन समस्यों का सामना करना पड़ता है?

उ. अध्यापक को अध्यापन के समय निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है- पढ़ाने की व्यवस्था करना, विद्यार्थियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना, कक्षा में अनुशासन बनाए रखना, विद्यालय में संसाधनों, उपकरणों, सामग्री, रसायनों आदि का अभाव होना। कक्षा में विद्यार्थियों का देरी से आना, विद्यार्थियों का ही समय पर शुल्क न देना, सहायता सामग्री, फर्नीचर, उपकरण यंत्रों, रसायनों आदि का अभाव होना अपेक्षित स्तर की शिक्षण सामग्री, पाठ्यपुस्तकों, कार्यपुस्तकों, पत्रिकाओं और विशेष पत्रिकाओं और लेखन सामग्री आदि का भी उपलब्ध न होना।

प्र.14 क्रियात्मक शोध की परिभाषा लिखिए?

उ. स्टेफिन एम. कोरे Stephen M. Corey (1953) ने सर्वप्रथम क्रियात्मक शोध शब्द का प्रयोग किया था। क्रियात्मक शोध, अध्यापकों और कक्षाओं की तात्कालिक समस्याओं के समाधान का क्रमबद्ध प्रयास है। विद्यालय के अध्यापकों से संबंधित समस्याओं के समाधान में क्रियात्मक शोध, उनकी क्षमताओं को विकसित करने की डीबी (Dewey) की विचारधारा के कार्यान्वयन को दर्शाता है।

प्र.15 क्रियात्मक शोध किस पर आधारित होता है?

उ. क्रियात्मक शोध, स्पष्ट और विशिष्ट अध्यापन या संबद्ध समस्या पर आधारित होता है। यदि एक बार समस्या की पहचान कर ली जाती है तो इसके समाधान की संभावित कार्यनीतियां बनाने की आवश्यकता पर विचार किया जाता है। अतः परिस्थितिपरक समस्या के लिए उपयुक्त शोध कार्य की पहचान करना आवश्यक होता है।

प्र.16 संगोष्ठियों का आयोजन किस उद्देश्य से किया जाता है?

उ. वर्तमान मुद्दों, समस्याओं और विचारों के संबंध में चर्चा करने के लिए संगोष्ठियों का आयोजन किया जा सकता है। माध्यमिक या उच्चतर विद्यालयों के अध्यापक, संगोष्ठियों का आयोजन कर सकते हैं।

प्र.17 कार्यशालाओं का आयोजन किस उद्देश्य से किया जाता है?

उ. वर्तमान मद्दों, समस्याओं और विचारों के संबंध में चर्चा करने के लिए संगोष्ठियों का आयोजन किया जा सकता है। माध्यमिक या उच्चतर विद्यालयों के अध्यापक, संगोष्ठियों का आयोजन कर सकते है।

प्र.18 कार्यशालाओं का आयोजन किस उद्देश्य से किया जाता है?

उ. कार्यशाला का आयोजन, विशेष शैक्षिक सामग्री, पुस्तक, संसाधन सामग्री, सहयोगपरक सामग्री, कार्यपुस्तिका आदि को विकसित करने के उद्देश्य से किसी संस्थान या संवृत्तिक संघ द्वारा किया जाता है। अध्यापकोंमें कुछ विशेष प्रकार के कौशल विकसित करने के उद्देश्य से भी कार्यशालाओं को आयोजन किया जा सकता है।

प्र.19 कार्यशाला किन-किन विषयों पर आयोजित की जा सकती है?

उ. कार्यशाला निम्नलिखित विषयों पर आयोजित की जा सकतीकंप्यूटर के बारे में अध्यापकों को जानकारी देना जिससे वे साधारण किस्म का कंप्यूटर साफ्टवेयर विकसित कर सकें। इसी प्रकार से कुछ विशेष प्रयोगशालाओं के कौशल विकसित करना, प्रश्न बैंक विकसित करना, विभिन्न परीक्षाओं के लिए प्रश्नों को निर्धारण करना और सुधारात्मक सुझाव देना आदि।

प्र.20 संसाधन केंद्र का उपयोग किस प्रकार किया जाता है?

उ. संसाधन केंद्र का उपयोग, विद्यार्थियों की शैक्षिक, मनोवैज्ञानिक तथा वैयक्तिक समस्याओं के लिए उपबोधन सेवाएं प्रदान करने के लिए भी किया जा सकता है।

प्र.21 विद्यार्थियों की व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान कहां हो सकता है?

उ. विद्यार्थियों की व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान संसाधन झदों से किया जा सकता है। एम.ए.आई.जी. परामर्श केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, एम.एस., बड़ौदा विश्वविद्यालय, बड़ोदरा आदि ऐसे संस्थान हैं जो इस प्रकार की नैदानिक सेवाएं प्रदान करते हैं।

प्र.22 आधुनिक शिक्षाविदों के अनुसार पाठ्यचर्या से क्या आशय है?

उ. आधुनिक शिक्षाविदों के अनुसार, पाठ्यचर्या से आशय पुस्तकालय, प्रयोगशाला और कार्यशाला में किया जाने वाला अध्ययन, क्रीड़ा स्थल में होने वाले खेलकूदों में भाग लेना और ऐसे स्थानों में अध्यापक और विद्यार्थी के बीच में स्थापित होने वाले बहुत से अनौपचारिक संबंधों में पाठ्य सहगामी कार्यकलाप भी शामिल है। इन्हें विद्यालय की पाठ्यचर्या का भाग माना जाता है।

प्र.23 पाठ्य-सहगामी कार्यकलाप को कितने शीर्षक के अंतर्गत श्रेणीबद्ध किया गया है?

उ. पाठ्य-सहगामी कार्यकलापों को सात शीर्षकों के अंतर्गत श्रेणीबद्ध किया गया है- साहित्यिक कार्यकलाप, शारीरिक विकास कार्यकलाप, सौंदर्यानुभूति और सांस्कृतिक विकास वाले कार्यकलाप, नागरिक विकास कार्यकलपा, समाज कल्याण संबंधी कार्यकलाप, अवकाश समय के लिए कार्यकलाप एवं भ्रमण संबंधी कार्यकलाप।

प्र.24 पाठ्य-सहगामी कार्यकलापों से क्या लाभ है?

उ. पाठ्य-सहगामी कार्यकलापों से निम्नलिखित लाभ होते हैंपाठ्यचारी कार्यकलापों में शैक्षिक मूल्य, सामाजिक भावना का विकास, चरित्र प्रशिक्षण, नेतृत्व के लिए, खाली समय का भरपूर उपयोग या मनोरंजन। अन्य साथियों के साथ मिलजुलकर कार्य करने की भावना, नागरिक मूल्यों का विकास, शारीरिक विकास, उन्नत अनुशासन, सौंदर्यनुभूतिक और सांस्कृतिक मूल्यों जैसे विभिन्न मूल्यों का समावेश होता है।

प्र.25 साहित्यक कार्यकलाप क्या होते हैं?

उ. साहित्य से संबद्ध कार्यकलाप, साहित्यिक कार्यकलाप कहलाते हैं।

प्र.26 साहित्यिक कार्यकलपों के अंतर्गत किन कार्यकलापों को शामिल किया जाता है?

उ. साहित्य कार्यकलापों के अंतर्गत वाद-विवाद, वाकपटुता, कविता पाठ, लेख लिखना, सुप्रसिद्ध हस्तियों को आमंत्रित करना, अध्ययन मंडल, निबंध लेखन, व्यक्तिगत कविताओं का पाठ, नाट्यकला (संवाद लिखना), साहित्यिक नुक्कड़, प्रदर्शनी का आयोजन, समाचार बुलेटिन आदि को शामिल किया जाता है।

Leave a Comment